Wednesday, 1 October 2014

भीगी आँखें.....



भीगी आँखें से मुस्कुराने का मज़ा और ही है...

हँसते मुस्कुराते आँखें नम हो जाने का मज़ा और है...

लफ्ज़ो में बात तो कोई भी समझ लेता है...

बिन कहे कोई, ख़ामोशी समझ जाए तो मज़ा और है...!!!

दीप 

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