Thursday, 13 October 2016

आजकल....





आदत सी हो गई है सबकी...,जुबान से फिर जाना आजकल...!


हो गया है लोगों को शौक...,मुहब्बत करना का शौक़ आजकल...!


मरते हर रोज ना जाने कितने चेहरों पर...,किस कदर आसान,हो गया इश्क़ आजकल...!


क्यों हो गई महदूद हर नज़र...,जिस्म तक ही आजकल...!


कोई नहीं जानता दिल की गहराई में उतरना...,पसन्द हैं नज़रों से गिरना आजकल...!


करना यकीं करना सब पर आँख बंद करके...,ये बेवकूफी 'दीप ' ना करना आजकल...!!!


दीप

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