Sunday, 9 August 2015

बादल...




अगर बादल छलका तो बारिश होगी ...,
पैमाने की भी शायद ..यही ख्वाहिश होगी ...!

कौन थकेगा बादल या मेरा साकी...,
रात भर दोनों की आजमाईश होगी ...!

इन आँखों को तो समझा भी लू.., पर इन काली घटाओं का क्या करू...,
जो बरसा बादल तो मेरे गम की नुमाइश होगी ...!

भीगी भीगी रात में,जो हो तू साथ में ...,

फिर कहाँ हमे किसी और नशे की गुंजाइश होगी ...!

मेरे साकी रख देना एक'जाम मेरी कब्र पे ...,
बाद मरने के बस में इतनी सी गुज़ारिश होगी...!!!

दीप 

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