Thursday, 1 October 2015

ऐसा भी होता है...


अक्सर ऐसा भी होता है...,
जो दे दूजे को कंधा रोने को...,
वो भी अकेले में रोता है...,
ओरों को हँसाने वाला अक्सर...,
सर तकिये पर रख रोता है...!

ऐसा भी होता है...,

नींद से पहले अक्सर...,
तकिया गीला होता है...,
जिन्दगी के खेल में...,
बात क्या करे हारने वालों की...,
अक्सर जीतने वाला भी... ,
जीत के बाद भी कर रोता है...!

ऐसा भी होता है...

बचपन से जल्दी जल्दी बङा बनना...,
हर एक का सपना होता है...,
जवानी का गुरुर अक्सर...,
बुढापे में अकेले में रोता है...!

ऐसा भी होता है...

मर्म जान लो जो, दूजे के रोने का...,
दर्द  अपने सीने में भी होता है...,
केवल वो ही तुम संग रोता है...,
दिल एक सच्चा जिसके सीने में होता है...,

होता है..... होता है..., अक्सर ऐसा भी होता है...!!!


दीप

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