Tuesday, 22 November 2016

माही



ना समझे मेरा यार...,मेरा माही...,  
बुहत है गहरा दिल में..., प्यार मेरा...!


सोचू तुझे ही.., खोई तुझमें ही..., मेरे माही...,
 बनी जोगन..., तेरे प्यार में..., मेरे माही...!


यू तो जाने दुनिया सारी..,पर ना जाने.., मेरा माही...,
ना समझा ना समझेगा.., मेरा प्यार.., मेरा माही...!


गुम में उसमें..., खोई उसकी ही धुन में...,वो मेरा माही,
 रंग सजे जिस संग, हैं...,वो ही बेख़बर मेरा माही...!


कहते है दुनियावाले सच ही..., ना समझेगा.., तेरा प्यार..,
करे जिसे तू दिल से प्यार..., वो ही बावरा हैं अंजान मेरा माही...!!!


दीप 

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