Thursday, 23 February 2017

जश्न ए रेख़्ता और मैं 2017

जश्न ए रेख़्ता और मैं



जश्न ए रेख़्ता और मै



मेरा पहला सफर रेख्ता के साथ तीन साल पहले एक मुशायरे में, शिरक़त से हुआ जहाँ मै, मरहूम निदा फ़ाज़ली जी  सुनने को  गयी थी !

पिछले साल रेख़्ता में volunteer  बन , रेख़्ता के साथ जुड़ने की मेरी ख्वाहिश को ख़ुदा ने भी मंज़ूर किया और मुझे volunteer के तौर पर जश्न- ए -रेख़्ता 2016 का हिस्सा होने का मौका मिला !

 और फिर इस साल 2016  नवम्बर जब रेख़्ता की तरफ से volunteers के लिए requirement का ऐलान हुआ, तो एक मर्तबा फिर से मौसिकी, शेर ओ शायरी के अब्दिबी लोगो को सुन ने के अवसर को मेने हाथो हाथ लिए !


 फिर शरू हुआ final confirmation का इंतज़ार और मेरा बार बार Rekhta team को twitter पे और  Tanvir को email कर के परेशान करने का सिलसिला और फिर 3 नवम्बर  को जब मुझे रेख़्ता की तरफ से email मिला तो लगा जैसे मन माँगी मुराद मिल गई !


और इसके साथ ही शुरू हुआ बेचैनी भरा इंतज़ार final confirmation ka.और मेरा Tanvir को बार-बार reminder email भेजने का !

 इस बार Email के  मुताबिक़  मुझे information desk की जिमेदारी दी गई थी ! 17 फरवरी दोपहर 3 बजे जब में IGNCA पहुँची तो लगा शायद बुहत जल्दी पहुंच गई हूँ क्युकी अभी तो सब व्यवस्थाये ही चल रही थी !


 पर फिर कुछ ही वक़्त में सभी volunteers को रेख्ता की तरफ से जिम्मेदारी मिल गई, और हम सभी volunteers (Abhishek, Hira, Wasi, Huma, Shahna) आपस में दोस्त भी बन गए, मैने  और Shahna ने एक टीम बना ली और साथ साथ काम बाँट लिया !


 श्याम के 6 बजते बजते हलचल और तेज हो गई और फिर मेरी ही आँखों से सिर्फ 2 फुट की दुरी पर Gulzar Sahab और Ustad Amjad Ali Khan Sahab जी से गुजरे ! उनके आने के कुछ देर बाद शरू हुआ जश्न !

जिसमे Gulzar Sahab और Ustad Amjad Ali Khan Sahab जश्न का उद्घाटन , फिर  AMAAN ALI और  AYAAN ALI की musical evening.

फिर दूसरे दिन Gulzar Sahab और  Javed Siddiqi Sahab discussion, Abdul Bismillah, Ali Ahmad Fatmi, Alok Rai and Manager Pandey- Hindustani zindagi ka naqsh- nigaar- PremChand, Sufi performance by child prodigy Khanak Joshi, Urdu Storytelling for Children with Kamal Pruthi, thertre ke bule hue rang - M S Sathyu, Nadira Babbar, Salim Arif and Saurabh Shukla, duraaye naina banaye batiyan khusro ki karishma kaaari- Gopi Chand Narang, Book realse Gulzar Sahab, Dilli jo ek Sheher tha- Irfan Habib in conversation with Rana Safvi, Performance by Vidya Shah with Danish Husain, Fill Screening- Mandi, Mushira- Abhishek Shukla, Azhar Inayati, Bharat Bhushan Pant, Farhat Ehsas, Gulzar Dehlvi, Liaqat Jafri, Moien Shadab, Shakeel Azmi, Shakeel Jamali, Sheen Kaaf Nizam, Vikas Sharma Raaz, Wasim Barelvi, Prasoon Joshi in conversation with Faridoon Shahryar, Shamim Hanfi in conversation with Dipa Bagai, Ghazal performance- Amrish Mishra, Kumar Vishwas in conversation with RJ Sayema, Urdu ka aadalti lehjza- Justice Aftab Alam, Salman Khurshid, Tahir Mahmood and Justice T S Thakur, Urdu Suron ka Mausam e Bahar- Annu Kapoor with Rumy Jafry.

क्या क्या नहीं था जो आपके दिल और दिमाग पर तरी उस नशे को भूलने ना दे !  Dastangoi, Mushira, Baitbazi, Urdu Bazar, Khuli Mishit, Qawali, Qhazal performance by ably challenged children, discussion on usage of Urdu in Legal matters, importance and impact of Urdu in Indian films, and above all the closing with Sufi Music by Hans Raj Hans भी ना  जाने कितने ही जाने मानी अज़ीम हस्तियाँ नज़रो के सामने थी और चल'रहा था उनका कभी ना खत्म होने वाला जादू !

 तीसरे दिन की शाम होते होते इस जादू से मैं और मेरा वज़ूद पूरी तरह सराबोर था, इस दौरान कुछ जाने पहचाने दोस्त और चेहरे भी मिले  जैसे – Rana Safvi ma’am, Mithlesh ji (#Mbaria), Ashish Sharma, Ashish Jhangra, Ishaan, Shachhi, Rakhi,  Atif Khan,  Mariam Karim-Ahlawat ma'am,  Udita Garg, Yaseen Anwar, से मुलाकात हुई !

  इन  तीन दिनों में ना जाने कितने हज़ारो लोग जश्न ए रेख्ता में शामिल होने आये और जश्न में  होने वाले सभी  कार्यकमों का आनंद लिया, ग़ज़ल गायकी हो या बैत-बाज़ी क़व्वाली हो या चर्चा ना जाने कितने ही दिल को लुभाने और आनंदित करने वाले कार्यकम

 और फिर वक़्त आया अलविद कहने का, इस दौरान team रेख़्ता के Tanvir, Dhamender, Parwaz Sir , Deepa, Haider Sir Priyanka ma'am aur Sanjiv Saraf Sir के साथ जुड़ा अनकहा दिल का रिश्ता कुछ और मजबूत हुआ, और दुआ करती हूँ, ये रिश्ता वक़्त के साथ और मजबूत हो !

 रेख्ता team को जश्न ए रेख़्ता 2017 के लिए बुहत बुहत मुबारकबाद, दुआ है रेख्ता ऐसे ही जश्न और करता रहे !



जश्न ए रेख़्ता के जश्न की कुछ झलकियाँ























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