Thursday, 28 April 2016

जरा चुपके से...




हिसाब दिल का लिखना जरा चुपके से...,
जवाब देना मुझको जरा चुपके से...!

चले आना मेरे ख्वाबों में जरा चुपके से...,
देखे हम ख्वाब नए जरा चुपके से...!

लम्हा दर लम्हा झुका के नज़रे कुछ हया से..., 
देखे तुम को हम जरा चुपके से...!

जब भी आना हो दिल कि दुनिया में...,
आ जाएगा जनाब जरा चुपके से...!!!

दीप 


2 comments:

  1. Bahot hi sundar. Chupke se pyaar karne ka maza hi kuchh alaag hai.

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    1. Thank you so much Jyotirmoy, glad you like my pen work, apologies for delay in responding. There was some issue with comments now hopefully resolved.

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